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धूप की आँख टेडी हुयी छाँव पर,

बन्धु दो-दो लडे सिर्फ एक गाँव पर,

फिर से सीना फुलाये हैं कौरव खडे

पाँडवों की लगी अस्मिता दाँव पर ।