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Showing posts from July, 2017

सब कान्हा की बांसुरियां हैं....

कैसे आएं खुली सड़क पर तंग बहुत ब्रज की गलियां हैं। जोग सिखाये कैसे ऊधौ सब कान्हा की बांसुरियां हैं। तम ही तम पसरा है चारों ओर ये कैसी पूनम आयी, अंतर्तम हो गया प्रकाशित मावस न...

एक गीत टूटन का.....

जिसको जीवन भर समझा था सपनों का इक घर खुली आँख तो पाया- टूटा फूटा सा खंडहर। घर के बिल्कुल पास समंदर खूब गरजता था, पर देहरी छूने का साहस कभी न करता था, ऊंची ऊंची लहरें फिर भी, नीची ...