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गीत

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा
जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर
अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं
सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर,

जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें
सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं,
जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना
खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं,
टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ
देख लेना कोई आइना तोड़ कर;

मैं तो जब जब नदी के किनारे गया
मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया,
पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी
उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया,
रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर
आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर,
[शेष संकलन में]

गीत

याद तुम्हारी कर के जब भी मेरे नयन सजल हो बेठे;
मन हो गया भागीरथ जेसा आंसू गंगा जल हो बेठे.
जीवन तो एक समझौता है
पल में हँसना पल में रोना,
एक तरफ़ फूलों से शादी
एक तरफ़ काँटों से गौना,
शायद कोई शिव मिल जाए सोच के यही गरल हो बेठे;
[शेष संकलन में]

ग़ज़ल

अब तो मेरा ख़याल है लड़कों की जिंदगी,
उलझा हुआ सवाल है लड़कों की जिंदगी,

पहले तो साडी बिंदी लिपस्टिक और पावडर
फ़िर लकड़ी आटा दाल है लड़कों की जिंदगी.

जातें हैं सुबह ताज़ा शाम आते हैं थक कर
सूरज के जैसा हाल है लड़कों की जिंदगी
[शेष संकलन में-----]

ग़ज़ल

हमें मुस्कान का मधुमास दे दो,
हमारे ही हो ये अहसास दे दो,

कभी फुर्सत मिली तो बांच लेंगे
हमें भोग हुआ इतिहास दे दो,

अगर रावण कोई फ़िर सर उठाये
किसी रघुवीर को बनवास दे दो,
[शेष सकलन में]

नवगीत

नींद नहीं आँखों में स्वप्न परेशान.
केसे बचें बारिश से रेत का मकान.
सडकों पर वाहनों की
दोड़ती कतार,
तेजी से भाग रहा
कितना संसार,
मिटते हें साथ साथ पैर के निशान.
[शेष संकलन में----]

मुक्तक

आबे ज़म ज़म है उधर और इधर गंगा जल,
एक तरफ़ गीत की खुशबु एक तरफ़ महके ग़ज़ल,
बड़ी मुश्किल में फंसा हूँ किसे देखूं पहले
एक तरफ़ प्यार मेरा एक तरफ़ ताजमहल।

मेरे महबूब ठहर जा तुझे कल देखूंगा,
तुझे पाने की राह और सरल देखूंगा,
कहीं छुप जाए न पूनम का चाँद बादल में
इसलिए पहले आज ताजमहल देखूंगा.
[ शेष संकलन में----]

गीत

मन तुम्हारा जब कभी भी हो चले आना
द्वार के सतिये तुम्हारी हें प्रतीछा में,

हाथ से हाथों को हमने थाम कर
साथ चलने के किए वादे कभी,
मंदिरों दरगाह पीपल सब जगह
जाके हमने बंधे थे धागे कभी,
प्रेम के हरेक मानक पर खरे थे हम
बैठ पाए न जाने क्यूँ परीक्षा में;

अक्ष्हरों के साथ बाँध हर पंक्ति में
याद आयी है निगोड़ी गीत में,
प्रीत की पुस्तक अधूरी रह गयी
सिसकियाँ घुलने लगीं संगीत में,
दर्द का ये संकलन मिल जाए तो पढ़ना
मत उलझना तुम कभी इसकी समीक्षा में;
[शेष संकलन में]

परिचय

नाम :डॉ. विष्णु सक्सेना
पिता :श्री(स्व० ) नारायण प्रकाश सक्सेना
माता :श्रीमती सरला देवी
पत्नी :श्रीमती वंदना सक्सेना
पुत्र :सारांश, चित्रांश
जन्म स्थान :ग्राम सहादत पुर,सि.राऊ(अलीगढ) उ.प्र
जन्म तिथि :१२ जनवरी
योग्यता :बी.ऐ.एम्.एस. ( राज.वि.वि.,जयपुर)

सम्मान:
मनहर अवार्ड (मुंबई),देवीलाल सामर अवार्ड (उदयपुर ),बेस्ट पोएट अवार्ड(उज्जैन),ओंकार तिवारी अवार्ड (जबलपुर),जनहित सेवा अवार्ड(चित्तोरगढ़),सुनील बजाज अवार्ड(कटनी), निर्झर अवार्ड(कासगंज),तूलिका अवार्ड(एटा),श्याम बाबा अवार्ड(हाथरस), हिन्दी प्रो .स.अवार्ड(सि .राव), महा देवी वर्मा अवार्ड(फर्रुखाबाद),कीर्तिमान अवार्ड(मैहर),गीत गौरव अवार्ड(एटा ), डॉ.उर्मिलेश अवार्ड(बदायूं ), गोपाल सिंह नेपाली अवार्ड(भागलपुर), प्रेमी अवार्ड(मेरठ ),काव्य श्री अवार्ड(पिलखुआ)


उपलब्धियाँ:
चिकित्सा एवं साहित्यिक लेखों का प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन ।
आकाशवाणी एवं दूर दर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण टीवी चैनल्स.(एन डी टीवी , सब टीवी, ई टीवी, जी टीवी, सहारा टीवी, सोनी, लाइव इंडिया, डी डी १ , डी डी भारती )
केसेट्स एवं सीडी -‘शंख और दीप’, ‘प्रेम कविता’, ‘तुम्हारे लिए’,’ढाई आखर प्रेम का ।
पुस्तकें -‘मधुवन मिले न मिले’, ‘आस्था का शिखर ’, ‘खुशबू लुटाता हूँ मैं’, ‘स्वर अहसासों के’.


विदेश यात्रायें:
ओमान(१९९५), इस्राइल(१९९७), थाईलैंड(२०००,२००५),अमेरिका(१९९७,२००१,२००३),दुबई(२००४,२००५,२००६,२००७), नेपाल(२००५), हांगकांग(२००७ )।