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ग़ज़ल

हमें मुस्कान का मधुमास दे दो,
हमारे ही हो ये अहसास दे दो,

कभी फुर्सत मिली तो बांच लेंगे
हमें भोग हुआ इतिहास दे दो,

अगर रावण कोई फ़िर सर उठाये
किसी रघुवीर को बनवास दे दो,
[शेष सकलन में]

1 comment:

इस्मत ज़ैदी said...

हमें मुस्कान का मधुमास दे दो,
हमारे ही हो ये अहसास दे दो,

ग़ज़ल में भी गीत का प्रभाव दिखाई दे रहा है

सुंदर भावाभिव्यक्ति