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रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा.......

रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं।

तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं।

मैं तो पतझर था फिर क्यूँ निमंत्रण दिया

ऋतु बसंती को तन पर लपेटे हुये,

आस मन में लिये प्यास तन में लिये

कब शरद आयी पल्लू समेटे हुये,

तुमने फेरीं निगाहें अँधेरा हुआ, ऐसा लगता है सूरज उगेगा नहीं।

मैं तो होली मना लूँगा सच मानिये

तुम दिवाली बनोगी ये आभास दो,

मैं तुम्हें सौंप दूँगा तुम्हारी धरा

तुम मुझे मेरे पँखों को आकाश दो,

उँगलियों पर दुपट्टा लपेटो न तुम, यूँ करोगे तो दिल चुप रहेगा नहीं।

आँख खोली तो तुम रुक्मिणी सी लगी

बन्द की आँख तो राधिका तुम लगीं,

जब भी सोचा तुम्हें शांत एकांत में

मीरा बाई सी एक साधिका तुम लगी,

कृष्ण की बाँसुरी पर भरोसा रखो, मन कहीं भी रहे पर डिगेगा नहीं।

16 comments:

संतोष कुमार said...

विष्णु जी आपकी ये रचना दिल को भा गई वाकई में क्या खूब कहा है..

"रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं।

तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं।"

Yatesh Garg said...

wah dr. sahab, dhamal kar diya aapne is kavita me.Ek-2 shabd me jaaaan hai.''UNGLIYON ME DUPATTA LAPETO NA TUM..'' aap ye shabd late kaise ho plz mujhe bhi bata do.

अल्पना वर्मा said...

हमारे एक मित्र प्रकाश गोविन्द जी से आप के बारे में बहुत बार सुना था ,आप का यह गीत 'रेत पर.. उनसे ही सुना था .आज अंतर्जाल पर आप को देख कर बहुत खुशी हुई.
आप बहुत ही अच्छा लिखते हैं .

अल्पना वर्मा said...

इस गीत को पढ़ने दोबारा आई ..आप का यह गीत मुझे सब से अधिक पसंद है .

kalpendra kashyap said...

A beautiful song I like most. I've listened you at farrukhabad.

Anonymous said...

जुड़िये हिंदी कवि व गीतकार डॉ. विष्णु सक्सैना के इस पेज के साथ ......
http://www.facebook.com/pages/%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A5%81-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BE-Dr-Vishnu-Saxena/164331323630582?sk=wall

Alok said...

प्रिय विष्णु जी,
आप लिखते तो अच्छा हैं ही, कविता पढ़ने का आपका अंदाज बहुत खूबसूरत है. खास कर यह कविता आपको टीवी पर पढते देख बस मन ने यही कहा ... “ दुनिया में यूँ तो हैं सुखनवर और भी अच्छे....”
साधुवाद.

आपका
आलोक सिन्हा, पटना

Raghav Singh said...

wah kavita likhi sir dil ko chhu k nikal gayi

RAHUL VASHISHTHA said...
This comment has been removed by the author.
RAHUL VASHISHTHA said...

आपकी समस्त रचनाएँ हृदय को स्पर्श करने वाली हैं।

neeraj garg said...

हर्दिय स्पर्शी

Kamendra Kashyap said...

Heart touching poem sir

Unknown said...

Dr. Vishu Ji I am die heart fan of your poems but ur this poem is ultimate...

and If we would like to call you in our function how can we reach you...?

Unknown said...

Dr. Vishu Ji I am die heart fan of your poems but ur this poem is ultimate...

and If we would like to call you in our function how can we reach you...?

Dattatreya Tripathy said...

Wah wah Vishnu sir, Kya baat hei!!Sachh mein sir,E git dil ko chhun gaya...

Unknown said...

Wahh sir
Kya khub Likha h Apne