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गीत-अपनाना हो तो अपनालो...

मेरे अंदर खोट बहुत है
अपनाना हो तो अपनालो,
दिल का मंदिर सूना सूना
आ जाओ एक दीप जला लो।

सच कहता हूँ जीवन भर मैं
सुर लय ताल समझ ना पाया,
जितना जैसा समझ सका हूँ
वैसा ही इस कंठ से गाया,
गीत और सुन्दर हो जाये
मेरे सुर से साज मिला लो।....

मेरी थकन देख कर मंज़िल
खुद चलकर के पास आगयी
भरी दुपहरी में भी ठंडक
यही धूप की अदा भा गयी
पथरीली है डगर तुम्हारी
गिर ना जाऊँ मुझे सम्हालो।....

कोई कहे मुझको आवारा
कोई कहे मुझको मनमौजी
पर नादान रहा जीवन भर
घूम घूम कस्तूरी खोजी,
फिर इस जग में खो ना जाऊँ
अपने अंदर मुझे छुपालो।.....

रंगों का गीत

रंग बिरंगे इस जीवन में
कुछ रंग फीके-कुछ रंग गहरे।
कुछ रंग आवारा बादल से
कुछ रंगों पर बैठे पहरे।

बचपन में भोलेपन का रंग
यौवन में जोशीले रंग थे,
प्रौढ़ हुए बेबस रंग छलके
रंग बुढ़ापे में बेढंग थे,
कुछ रंगों ने आँखे खोलीं
कुछ रंगों से हो गए बहरे।
कुछ रंग आवारा बादल से
कुछ रंगों पर बैठे पहरे।

किस्मत ने मेरे आँगन में
रंग-रंग के रंग दिखाये,
कुछ रंगों ने आँख तरेरी
कुछ रंगों ने अंग सजाए,
कुछ रंगों ने जल्दी कर दी
कुछ रंग अंत समय तक ठहरे।
कुछ रंग आवारा बादल से
कुछ रंगों पर बैठे पहरे।

कर्म भूमि की इस दुनियाँ में
श्रम तो सबको करना होगा,
प्रभु तो सिर्फ लकीरें देता
रंग हमें ही भरना होगा,
जीवन के रूठे पन्नों में
भरने होंगे रंग सुनहरे।
कुछ रंग आवारा बादल से
कुछ रंगों पर बैठे पहरे।

दीवारें ढहने दो...

दम घुटता हो बीच में जिनके
वो सब दीवारे ढहने दो।

ना मेने कोई ध्यान लगाया
और न कोई करी तपस्या।
इसी लिए जीवन मे सारे
समाधान बन गए समस्या
मन की मन में रह ना जाये
इसीलिए वो सब कहने दो।

धूप न निकली, कोहरा छाया
तापमान में कमी हुयी है।
पास से देखो इस पर्वत पर
बर्फ प्यार की जमी हुयी है।
छूने भर से पिघल के दरिया
बन बहता है तो बहने दो।  

सुन कर मृग आ जाएँ ऐसी
मीठी मेरी तान नही है।
सब आसानी से मिल जाये
ये किस्मत धनवान नही है।
हो जाऊं मैं धनी गले में
तुम इन बाहों के गहने दो