क़सम तोड़ दें.........

01 February 2012



चाँदनी रात में-

रँग ले हाथ में-

ज़िन्दगी को नया मोड़ दें,

तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।


प्यार की होड़ में दौड़ कर देखिये,

झूठे बन्धन सभी तोड़ कर देखिये,

श्याम रंग में जो मीरा ने चूनर रंगी

वो ही चूनर ज़रा ओढ़ कर देखिये,

तुम अगर साथ दो-

हाथ में हाथ दो-

सारी दुनियाँ को हम छोड़ दें...

तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।


देखिए मस्त कितनी बसंती छटा,

रँग से रँग मिलकर के बनती घटा,

सिर्फ दो अंक का प्रश्न हल को मिला

जोड़ करना था तुमने दिया है घटा,

एक हैं अंक हम-

एक हो अंक तुम-

आओ दोनों को अब जोड़ दें.....

तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।


स्वप्न आँसू बहाकर न गीला करो,

प्रेम का पाश इतना न ढीला करो,

यूँ ही बढ़ती रहें अपनी नादानियाँ

हमको छूकर के इतना नशीला करो,

हम को जितना दिखा-

सिर्फ तुमको लिखा-

अब ये पन्ना यहीं मोड़ दें.....

तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

एक दीवाली यहाँ भी मना लीजिये........

22 October 2011

झील के जल सी ठहरी है एक ज़िंदगी

आप ही छू के लहरें उठा दीजिये,

मेरे घर अन्धेरों का मेला लगा

एक दीवाली यहाँ भी मना लीजिये।


बांध लो तुम जो ज़ुल्फें सवेरा सा हो

और बिखेरो यहाँ रात हो जायेगी,

चाहे मुँह फेर कर यूँ ही बैठे रहो

तुम से फिर भी मेरी बात हो जायेगी,

मुद्दतों से न सूरज इधर आ सका-

दूरियों की घटायें घटा दीजिये।


जाने चन्दा से रूठी है क्यूँ चाँदनी

नींद भी रूठ बैठी मेरी आँख से,

रूठी-रूठी लहर आज तट से लगे

पर न भँवरा ये रूठा कँवल पाँख से,

मन तुम्हारा भी दरपन सा हो जायेगा-

धूल इस पर लगी जो हटा दीजिये।


जब भी आँखों में झाँका घटायें दिखीं

अब तो बरसेंगी ये सोचने मन लगा,

तन झुलसता रहा, पर न बारिश हुयी

प्यासा-प्यासा सा हर बार सावन रहा,

स्वांति की न सही बूँद आँसू की दे

प्यास चातक की कुछ तो बुझा दीजिये।

आँसू गंगा जल हो बैठे.....................

याद तुम्हारी करके जब भी मेरे नयन सजल हो बैठे।

मन हो गया भगीरथ जैसा आँसू गंगा जल हो बैठे॥


प्यास दबाये बैठी कब से

सूख रहा था जिसका कण कण,

चाह बरसने की थी मन में

पर न धरा ने दिया निमंत्रण

इस पर्वत से उस पर्वत हम आवारा बदल हो बैठे॥


एक कली के पास गया तो

बोली मुझसे मुझे न तोडें,

जब वो खिल कर फूल बनी तो

मन ये बोला रिश्ता जोडें,

जब उसको चूमा काँटों से होंठ मेरे घायल हो बैठे॥


जीवन तो एक समझौता है

पल में हँसना पल में रोना,

एक तरफ फूलों से शादी

एक तरफ काँटों से गौना,

शायद कोई शिव मिल जाये सोच के यही गरल हो बैठे॥


रही अमावस सखा हमारी

साथ ले गये तुम तो पूनम,

एक आँख से खुशी झलकती

एक आँख आँसू से है नम,

जो भी चाहे वो हल कर ले हम वो प्रश्न सरल हो बैठे॥


बन के नींद मेरी पलकों को


तुमने कितना मान दिया है,

सपनों में बातें कर तुमने

इस दिल पर अहसान किया है,

झील सी नीली आँखों में हम लगने को काजल हो बैठे॥

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