गुनगुनाकर कह रहीं हमसे हवाएं आओ मेरे साथ सपनों को सजायें वर्ष भर जो शूल से चुभते रहे हैं आओ उनको फूल का उपहार दे दें, जिस कली ने ज़िन्दगी को खुशबुएँ दीं हम सुगंधि का उसे आभार द...
जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी हमसे छुड़ा के हाथ न जाने किधर गयी। तुम मिल गए हो तब से हमे लग रहा है यूँ बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी। गुल की हरेक पंखुरी को नोच कर कहा त...
यादों को मैं रख लेता हूँ....... फूलों को तुम लेते जाओ, काँटों को मैं रख लेता हूँ। मेरी मुस्कानें तुम रख लो अश्कों को मैं रख लेता हूँ। कितना अच्छा लगता था तब जब मौसम था साथ हमारे, मेह...
ग़मो को आईना दिखला रहा हूँ। मुसलसल चोट दिल पे खा रहा हूँ। ज़मीं और आसमाँ मिलते नहीं हैं मैं इससे कब भला घबरा रहा हूँ? गया जो वक्त वो वापस न होगा मैं उल्टे पाँव वापस आ रहा हूँ। वो ज...
सोचिये गर दो दिलों में राब्ता हो जायेगा। हिचकियों का खूबसूरत सिलसिला हो जायेगा। दिल मेरा बच्चा है अपने पास ही रखिये इसे लग गयी इसको हवा तो बेवफा हो जायेगा। जिस्म था बेजान ...