ग़मो को आईना दिखला रहा हूँ। मुसलसल चोट दिल पे खा रहा हूँ। ज़मीं और आसमाँ मिलते नहीं हैं मैं इससे कब भला घबरा रहा हूँ? गया जो वक्त वो वापस न होगा मैं उल्टे पाँव वापस आ रहा हूँ। वो ज...
सोचिये गर दो दिलों में राब्ता हो जायेगा। हिचकियों का खूबसूरत सिलसिला हो जायेगा। दिल मेरा बच्चा है अपने पास ही रखिये इसे लग गयी इसको हवा तो बेवफा हो जायेगा। जिस्म था बेजान ...