बेबसी के तम घनेरे कब तलक हमको छलेंगे? ये अन्धेरे तब छटेंगे दीप बन जब हम जलेंगे। चाहता है हर कोई हमको फँसाना जाल में, कुछ न कुछ लगता है काला ज़िंदगी की दाल में, हर तरफ फन को उठाये न...
मेरे अंदर खोट बहुत है अपनाना हो तो अपनालो, दिल का मंदिर सूना सूना आ जाओ एक दीप जला लो। सच कहता हूँ जीवन भर मैं सुर लय ताल समझ ना पाया, जितना जैसा समझ सका हूँ वैसा ही इस कंठ से गाय...
रंग बिरंगे इस जीवन में कुछ रंग फीके-कुछ रंग गहरे। कुछ रंग आवारा बादल से कुछ रंगों पर बैठे पहरे। बचपन में भोलेपन का रंग यौवन में जोशीले रंग थे, प्रौढ़ हुए बेबस रंग छलके रंग बुढ़...
दम घुटता हो बीच में जिनके वो सब दीवारे ढहने दो। ना मेने कोई ध्यान लगाया और न कोई करी तपस्या। इसी लिए जीवन मे सारे समाधान बन गए समस्या मन की मन में रह ना जाये इसीलिए वो सब कहने द...
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे कहाँ ज़िन्दगी, खुशनुमा ज़िन्दगी की तुम्ही आस हो। मेरा दिल हो तुम्ही उसकी धड़कन तुम्ही जिस्म में आती जाती हुई श्वास हो। अब न मंदिर न मस्जिद सुहाता मुझे प...
मत घबरा तुझमें और मंज़िल में थोड़ी सी दूरी है। चाहे जितना भी मुश्किल हो पहला कदम ज़रूरी है। सूरज को मत देख घूर,कर, तुझको अंधा कर देगा, तेरे जीवन मे पूनम की जगह अमावस धर देगा, क्यो भ...
जिसको जीवन भर समझा था सपनों का इक घर खुली आँख तो पाया- टूटा फूटा सा खंडहर। घर के बिल्कुल पास समंदर खूब गरजता था, पर देहरी छूने का साहस कभी न करता था, ऊंची ऊंची लहरें फिर भी, नीची ...