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गीतकार डॉ.विष्णु सक्सैना: गीत

गीतकार डॉ.विष्णु सक्सैना: गीत

गीत

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर, जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं, जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं, टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ देख लेना कोई आइना तोड़ कर; मैं तो जब जब नदी के किनारे गया मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया, पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया, रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर, [शेष संकलन में]

गीत

याद तुम्हारी कर के जब भी मेरे नयन सजल हो बेठे; मन हो गया भागीरथ जेसा आंसू गंगा जल हो बेठे. जीवन तो एक समझौता है पल में हँसना पल में रोना, एक तरफ़ फूलों से शादी एक तरफ़ काँटों से गौना, शायद कोई शिव मिल जाए सोच के यही गरल हो बेठे; [शेष संकलन में]

ग़ज़ल

अब तो मेरा ख़याल है लड़कों की जिंदगी, उलझा हुआ सवाल है लड़कों की जिंदगी, पहले तो साडी बिंदी लिपस्टिक और पावडर फ़िर लकड़ी आटा दाल है लड़कों की जिंदगी. जातें हैं सुबह ताज़ा शाम आते हैं थक कर सूरज के जैसा हाल है लड़कों की जिंदगी [शेष संकलन में-----]

ग़ज़ल

हमें मुस्कान का मधुमास दे दो, हमारे ही हो ये अहसास दे दो, कभी फुर्सत मिली तो बांच लेंगे हमें भोग हुआ इतिहास दे दो, अगर रावण कोई फ़िर सर उठाये किसी रघुवीर को बनवास दे दो, [शेष सकलन में]

नवगीत

नींद नहीं आँखों में स्वप्न परेशान. केसे बचें बारिश से रेत का मकान. सडकों पर वाहनों की दोड़ती कतार, तेजी से भाग रहा कितना संसार, मिटते हें साथ साथ पैर के निशान. [शेष संकलन में----]

मुक्तक

आबे ज़म ज़म है उधर और इधर गंगा जल, एक तरफ़ गीत की खुशबु एक तरफ़ महके ग़ज़ल, बड़ी मुश्किल में फंसा हूँ किसे देखूं पहले एक तरफ़ प्यार मेरा एक तरफ़ ताजमहल। मेरे महबूब ठहर जा तुझे कल देखूंगा, तुझे पाने की राह और सरल देखूंगा, कहीं छुप जाए न पूनम का चाँद बादल में इसलिए पहले आज ताजमहल देखूंगा. [ शेष संकलन में----]