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क़सम तोड़ दें.........

चाँदनी रात में-
रँग ले हाथ में-
ज़िन्दगी को नया मोड़ दें,
तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

प्यार की होड़ में दौड़ कर देखिये,
झूठे बन्धन सभी तोड़ कर देखिये,
श्याम रंग में जो मीरा ने चूनर रंगी
वो ही चूनर ज़रा ओढ़ कर देखिये,
तुम अगर साथ दो-
हाथ में हाथ दो-
सारी दुनियाँ को हम छोड़ दें...
तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

देखिए मस्त कितनी बसंती छटा,
रँग से रँग मिलकर के बनती घटा,
सिर्फ दो अंक का प्रश्न हल को मिला
जोड़ करना था तुमने दिया है घटा,
एक हैं अंक हम-
एक हो अंक तुम-
आओ दोनों को अब जोड़ दें.....
तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

स्वप्न आँसू बहाकर न गीला करो,
प्रेम का पाश इतना न ढीला करो,
यूँ ही बढ़ती रहें अपनी नादानियाँ
हमको छूकर के इतना नशीला करो,
हम को जितना दिखा-
सिर्फ तुमको लिखा-
अब ये पन्ना यहीं मोड़ दें.....

तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

14 comments:

आनन्द विश्वास said...

अति सुन्दर प्रस्तुति। मन से निकल कर
मन तक पहुँचने वाली मार्मिक रचना।
मनभावन।

आनन्द विश्वास

Dr.Lalit Narayan Mishra said...

nice one

Shivendra1221 said...

wow i am big. fan

yash said...

bahut sundar abhivyakti ..aadarniya Vishnu ji

lakhan kumar said...

kya baat hai sir mai to aapka mureed ho gaya hun......

kapil jain said...


Greatest..salute hai sahab ko

kapil jain said...


Greatest..salute hai sahab ko

Abhishek Agarwal said...

Bhot badiya

Abhishek Agarwal said...

Bhot badiya

Vivek Srivastava said...

Dr Sahab aap logo ki wajah se hi aaj pyar zinda hai. Aur aapki kavitaon se hi aaj ke mahol me hum log mehsus karte hain ki pyar ka ehsas kaisa hota hai.........

Shakti Bareth said...

बहुत खुब सर,
अतुलनीय ..

Jyoti Garg said...

Sir I am a big fan of your poetry. I want to meet u if u don't mind

Jyoti Garg said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

Really I am too big fan of you....