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khaas sammaan

यूँ तो सम्मान बहुत मिलते रहते है सम्मान तो सम्मान है छोटा हो या बडा लेकिन कुछ सम्मान ऐसे होते है जो ऊर्जा का संचार करते रहते हैं । वैसे ही गत दिनो मुझे एक सम्मान मिला साहित्य कलाधर का निराला और सुमन जी की पावन धरा पर, रमई काका और प्रताप मरायण मिश्र की जमीन पर। एक सुन्दर सा सम्मान पत्र, शाल श्री फल, एक 15000 की धन राशि। जिस जगह का छोटा सा छोटा कवि छन्द में बात करता हो उस धरती ने मुझ जैसे अदना ,सामान्य, और सादा भाषा मे लिखने वाले प्रेम के प्रेम के गीतकार को इस सम्मान के लायक समझा। इसी समारोह में सम्मानित होने वाली एक मुर्धन्य कवियत्री को जब मैने उन्हे सम्मान से पूर्व बधाई दी तो उन्होंने मुँह बिचकाकर कहा कि उस सम्मान का कोइ महत्व थोडे ही है वो तो मँच पर जितने होते है सभी को देते हैं, बाद में वो किन्ही कारणों से वहां पहुँची भी नहीं। लेकिन मँच पर ऐसा कुछ भी नहीं था। कुछ खास लोगों को ही सम्मान से नवाज़ा गया था। लेकिन मेरे लिये ये सम्मान बहुत महत्व पूर्ण था.......

4 comments:

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

आदरणीय सक्सेना जी आदाब
अपनी रचनाओं से हर जगह धूम मचा रहे
और सबके दिलों पर छा रहे हरदिल अज़ीज़ कवि
’डा. विष्णु सक्सेना’ जी
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है.....
कभी जज़्बात पर आईयेगा
http://shahidmirza.blogspot.com/

डॉ. विष्णु सक्सैना said...

dhanyavaad shahid bhaai , aapane meraa hosalaa badhaayaa.

Sandeep Madawaar Gupta said...

Dr sahab, maine aapko agra sur sadan mai kai dafa suna hai aur un clips aaj tak maine apne paas sahaj kar rakha hai.mujhe aapki lines sunna bhut accha lagta hai.U.P ke gaurav hai aap.

Dev said...

vishnu ji samman samman hota hai koi bhi us kaviyatri ko sirf khijh hogi aur kuch nahi aapko badhai ho bahut bahut kyunki mai bhi ek geetkar hu to samajh sakta hu . age aapko aur bhi bade samman mile iske liya meri duaye aapke sath hai

dev .. mumbai