मंथरा मिल जाएगी/ कोरोना विशेष

आजकल हर सुबह बड़ी डरावनी होती जा रही है. लोग बेबस हैं. अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जाना मानो वरदान से कम नहीं है. पूरा समाज भी एक हो गया है बस कुछ लोगों को छोड़कर जो इस समय में भी मुनाफा कमाने के लिए ईमान बेचे दे रहे हैं. सब एक दूसरे की मदद कर रहे हैं, जैसे भी हो पा रही है. काफी लोग ऐसी स्थिति में बेचैनी पैदा करने का काम कर रहे हैं. मैंने पहले भी कहा कि इस समय व्यवस्था को कोसना  व्यर्थ है क्योंकि यह व्यवस्था हम लोगों ने ही खड़ी की है. और इस आपदा में तो आपका देश क्या, कोई भी देश होता वो बिखर जाता. 
समय है नागरिकों को अपने दायित्वों को समझना. एकजुट रहना. अफवाहें ना फैलाना. और हां, वैक्सीन मौका मिलते ही लगवा लीजिए. इस समय यही घिसी पिटी बातें समझाई जा सकती हैं. और आपको इन्हीं को सुनना है और इन्हीं का पालन करना है. अफवाहें और बेचैनी पैदा करने वाले हर ज़रिए को दूर रखिए चाहें वो कोई पत्रकार हो, नेता हो या आपका कोई दोस्त. तुरंत ब्लॉक मारिए. यह समय मेरी पार्टी और तेरी पार्टी करने का नहीं है. एक ही मकसद रखिए कि जैसे भी हो पाए मदद करना है और न कर पाएं तो अपने काम से काम रखिए और ईश्वर से प्रार्थना कीजिए कि यह समय जल्दी टल जाए 🙏
बस और कुछ नहीं..

प्यार से सींची हुयी हर कली खिल जाएगी,
वरना विश्वास की मीनार भी हिल  जाएगी,
कैकयी जैसा अगर  मन  को बनाया हमने-
कान   भरने   कोई   मंथरा  मिल   जाएगी.

~ डा. विष्णु सक्सेना । #विष्णुलोक 🍀

(मैं सोशल मीडिया पर मदद का आश्वासन नहीं दे पा रहा हूं क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर मेरे पास दिन भर कॉल्स और मैसेज का तांता लगा रहता है. उनमें से भी कुछ की मदद कर पाता हूं और कहीं से निराशा ही हाथ लगती है. 🙏 )

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