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प्रेरक गीत-2

मत घबरा तुझमें और मंज़िल में थोड़ी सी दूरी है।
चाहे जितना भी मुश्किल हो पहला कदम ज़रूरी है।

सूरज को मत देख घूर,कर,
तुझको अंधा कर देगा,
तेरे जीवन मे पूनम की जगह
अमावस धर देगा,
क्यो भटका फिरता जब तेरे पास  एक कस्तूरी है।
चाहे.....

तट पर बैठे-बैठे तेरे
हाथ कहाँ कुछ आएगा,
रत्न मिलेंगे तुझको जब
सागर के तह में जायेगा,
कुछ ना आया हाथ समझना डुबकी अभी अधूरी है।
चाहे.....

घने तिमिर के जंगल से
इक दिया अकेला जूझ रहा,
और उजाले में भी तू
चलने का रस्ता बूझ रहा,
हिम्मत से बढ़ता जा प्यारे सुबह बहुत सिंदूरी है।
चाहे.....

पकड़ के उंगली जो हमको
पैरों चलना सिखलाते हैं,
उनको हम मुश्किल राहों पर
इकलौता कर जाते हैं,
फ़र्ज़, वफ़ा, रिश्ते भूले सब ये कैसी मजबूरी है।
चाहे.....

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