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सबसे अच्छा बचपन


बुरा बुढापा,भली जवानी लेकिन सबसे अच्छा बचपन
निर्मल जल सा, साफ-साफ है इस बचपन के मन का आँगन।

दिल चाहे जी भर दुलराए
दिल चाहे झट चुम्बन ले ले
निश्छल सा बचपन भी चाहे 
वो सबकी बाहों में खेले,
मन करता है इसे बना लें हम अपने जीवन का दरपन।.....

वक्त बहुत बदला है फिर भी
बच्चों की हठ बदल न पाई,
पसरा झूठ हर तरफ फिर भी
बचपन से लिपटी सच्चाई,
झरता रहता हर मौसम में इनकी निश्छलता का सावन।.....

हम लड़ जाएं तो ना देखें
इक दूजे का मुँह जीवन भर,
ये लड़ते, पिटते, रोते पर
अगले ही पल मिलते हँसकर,
दूर बहुत है झूठ-कपट-छल, इनमें ही बसते हैं भगवन।.....
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