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नारी समर्थित गीत

ज़िन्दगी बिन तुम्हारे कहाँ ज़िन्दगी,
खुशनुमा ज़िन्दगी की तुम्ही आस हो।
मेरा दिल हो तुम्ही उसकी धड़कन तुम्ही
जिस्म में आती जाती हुई श्वास हो।

अब न मंदिर न मस्जिद सुहाता मुझे
पास तुम हो तो प्रभु की ज़रूरत नहीँ,
बस तुम्हे देखकर काम सब हों शुरू
तुमसे अच्छा है कोई महूरत नहीँ,
बिन तुम्हारे मैं जग देख पाता न माँ
हर समय तुम मेरे आस ही पास हो।
ज़िन्दगी......

तुम न होतीं तो बचपन था सूना मेरा
अपनी राखी से भर दी कलाई मेरी,
माँ न डांटे मुझे फिर किसी बात ।।पर
तुमने शैतानी हर इक छुपायी मेरी,
मेरी हमराज़ हो दोस्त हो तुम बहन
नर्म भावों भरा एक अहसास हो।
ज़िन्दगी.......

मेरी नन्ही परी मेरे जीवन में तुम
प्यार का, मुस्कुराहट का इक पर्व हो,
मेरी हर मान्यता को निभाती हुई
मेरी लाडो मेरा मान हो, गर्व हो,
तुम दिवाली की एक रौशनी हो सुता
और होली के रंगों का उल्लास हो।
ज़िन्दगी.......

सारे नाते जगत के हैं अपनी जगह
पर तुम्हारी जगह ले न पाया कोई,
स्वर मधुर ही निकलता है इस साज़ से
प्यार के सुर में जब गीत गाया कोई,
रास हो, ख़ास हो, मेरे विश्वास हो
मेरी अर्धांगिनी तुम मेरी प्यास हो।
ज़िन्दगी.......

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