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गीत-अपनाना हो तो अपनालो...

मेरे अंदर खोट बहुत है
अपनाना हो तो अपनालो,
दिल का मंदिर सूना सूना
आ जाओ एक दीप जला लो।

सच कहता हूँ जीवन भर मैं
सुर लय ताल समझ ना पाया,
जितना जैसा समझ सका हूँ
वैसा ही इस कंठ से गाया,
गीत और सुन्दर हो जाये
मेरे सुर से साज मिला लो।....

मेरी थकन देख कर मंज़िल
खुद चलकर के पास आगयी
भरी दुपहरी में भी ठंडक
यही धूप की अदा भा गयी
पथरीली है डगर तुम्हारी
गिर ना जाऊँ मुझे सम्हालो।....

कोई कहे मुझको आवारा
कोई कहे मुझको मनमौजी
पर नादान रहा जीवन भर
घूम घूम कस्तूरी खोजी,
फिर इस जग में खो ना जाऊँ
अपने अंदर मुझे छुपालो।.....

1 comment:

Kavita Rawat said...

जिंदगी का सुर-लय-ताल समझना आसान नहीं किसी के लिए भी
बहुत सुन्दर रचना