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गीत

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा
जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर
अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं
सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर,

जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें
सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं,
जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना
खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं,
टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ
देख लेना कोई आइना तोड़ कर;

मैं तो जब जब नदी के किनारे गया
मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया,
पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी
उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया,
रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर
आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर,
[शेष संकलन में]

22 comments:

श्रद्धा जैन said...

aapne blog bana kar hum jaise logon par upkaar kiya hai jinko kuch bhi padhne ke liye net ka mohtaaj hona padhta hai
jinka gyaan simit hai net ki duniya tak

aapko aaj padha aur jana achha laga
umeed hai ki mujhe aapki bhaut aur puri kavitaye padhne milengi

Prem said...

Bachpan se aaj tak aapka naam sunta aaya hoon... Aaj aapka blog dekh ke dil ko nahut achcha laga...

ज्ञान प्रकाश शुक्ला said...

Aapke blog se hume aapki sari books ke nam pata ho gaye hai..............

deekav said...

apko pehli baar 2008 mein IET lucknow mein suna tha.apki rachnao ne mujh par kafi asar daala hai.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

आदरणीय सक्सेना जी आदाब
अपनी रचनाओं से हर जगह धूम मचा रहे
और सबके दिलों पर छा रहे हरदिल अज़ीज़ कवि
’डा. विष्णु सक्सेना’ जी
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है.....
कभी जज़्बात पर आईयेगा
http://shahidmirza.blogspot.com/

इस्मत ज़ैदी said...

सक्सेना जी ,नमस्कार
बहुत बहुत स्वागत है आप का ,
आज तो बहुत अच्छा दिन रहा ब्लॉग जगत के लिए,
आप जैसे कवि को पढ़ना एक बहुत ही अच्छा अनुभव होता है ,सतना में आप को सुनने के बाद आज तक आप के गीत कानों में गूंज रहे हैं ,

रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर
आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर,

बहुत सुंदर!

Nitti said...

Sir please aap blogspot per apni saari kavitaye or unmse jitni ho sakta ho daal dijiye. hum logo ko aapki poems bahut pasand hai,

Nitti said...

Sir aapne sirf 4-5 gajal , muktam Blog par dale hai jiske log etne diwane hai. Pls apne jyada se jyada poems blog par daale, mera sara circal aapka diwana ho chuka hai

ashu said...

dada app ke geeto ko sabdo se nawaja jaye ye to maa saarde ki taheen hogi
koyki apke geeto me to maa saarde swam virajmaan rahti hai or kisi ke kisi ke samne uski tareef nahi ki jati hai

HEMANT JAIN said...

... अद्भुत !!!

amit said...

I have watched you on TV in Wah wah kya baat hi program n I am totly moved by your poetry. Now I m your fan n follow u through. Thanks
Amit Shaw. Kolkata

Anonymous said...

Namaskar sir,
Yun hi nahi apko prince of heart nahi kaha jata. Is there any books of ur poems or cd of ur poems. Pls reply. Thanks shashi

Anil Gautam said...

Vishu Sir aaj maine pshli baar apko wah ! wah ! kya baat me suna ..... mujhe apko sunkar bahut hi achcha laga....

Rajeev said...

Dr. Vishnu Saxena Ji Good Morning...
Me apki gazal,geet ka bahut shoukin hu aaj tak apne jitne gazal or geet like hain shayad hi me kio na sun paya hunga nahi to sab sune bhi hai or apne college me gaye bhi hai,

Jab se apne wah wah kya baat hai me aana shuru kiya hai apka koi bhi episode mis nahi kiya hai.....


Ye to patthar me bhi moorat ubhar dete hain,
Usme bharte hain rang or nikhar dete hain,
Itne bhole hain ye ladke ye jante hi nahi,
Ek muskaan pe jeevan guzar dete hain.......

sushil raana said...

Dr you are great, you write from heart we read from heart, and heart became garden garden

Ankit Gupta said...

Hello Sir,

I just want to know from where i get your books online.

As i searched a lot but didnt find any book of yours instead Lokpriyata ke shikhar geet and also purchased this one.

Please provide the leads if any :)

shailendra rastogi said...

Apko bahut bahut pranam..
44th SHRI RAM KAVI SAMMELAN Me aapko live sunne ka saubhagya mila. apke muktak aur geet humesha antahsparshi hote hain..
--Shailendra Rasogi

My Thought-My LIfe said...

प्रणाम सर,
सर मैं ये तो नही कहूँगा की मैं आपका बहुत बड़ा प्रसंशक हू बस इतना कहना चाहूँगा की मैं जब से आपके गीतो को कविताओ को सुना हर जगह से आपके कविताओ को गीतो एकत्र कर के सुनने की चाह रहती है चाहे वो "वाह वाह क्या बात है "की मंच हो या कोई कवि सम्मेलन या आपके ब्लॉग बस पता हुआ नही उसे डाऊनलोड करते है और जब कभी दिन मे फ़ुर्सत मिलता है फिर वो गुनगुनाना हो या आपके आवाज़ मे सुनना तो सुनता हू| आपकी भाषा विल्कुल सरल और सहज़ होने के वज़ह से जेहन मे जल्दी घर बना लेता है और स्वर की बात करे तो सरस्वती जी की कृपा है आप पर ...मीठा आवाज़ और ऐसा की शब्द खुद ब खुद परिभाषित हो उठते है.. मेरे बाबू जी जो एक सेवानिवरत अध्यापक है वो भी आपके प्रसंशक है वो आपके आवाज़ से पहचान लेते है और मन्त्र मुग्ध होकर सुनते है...
आपने हिन्दी कविताओ को वो पहचान दी की आज हम युवा (हॉलिवुड व बॉलीवुड के दौर के ) आकर्षित हुए..जिनसे ये प्रतीत होता है कि लोग 14 सितंबर (हिन्दी- दिवस) के अलावा और दिन हिन्दी के बारे मे बात नही करते थे लेकिन अब सुनने और पसंद करने वाले लोगो मे इज़ाफ़ा हुआ है|और मेरी खुद की भी रूचि लिखने मे है और आपसे सीखते रहते है शब्दो सही चयन और जगह क बारे मे :)
आप ऐसे ही हिन्दी के विकास मे जान डालते रहते ...
आप हमेशा स्वस्थ एवं समृद्ध बने रहे यही शुभ कामना है
आपका प्रसंशक-
विनय

Om Mishra said...

आपने लखीमपुर खीरी मे बहुत अच्छा सुनाया सर जी
और जो पहला गीत अपने सुनाया मन तुम्हारा बहुत ही सुन्दर गीत है इस गीत मे जो आपने हिंदी के शुद्ध पवित्र शब्दो का सुन्दर प्रयोग किया बहुत ही लाजवाब है
और सर एक बात आपके गीत की धुन हमेशा दिल को छू लेती है सबसे अलग धुन होती है
I LOVE U SIR JI
Om mishra lakhimpur kheri

Om Mishra said...

सर जी एक बात और आपसे कहना चाहता हूँ
आप सबको कुछ ना कुछ रिप्लाईजरूर किया करे इससे हम सबको और भी अच्छा लगेगा

Unknown said...

अतुलनीय रचना सर जी। अत्यंत सुन्दर। ह्रदयस्पर्शी

Unknown said...

क्या बात हैं सर बहुत ही सुंदर